दिसंबर 01, 2025

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By: नवतेज भारती

अज्ज दी रात

जे संगदी तों मैथों

कहि नहीं होइआ

तूं आप ही रहि जांदा

अज दी रात

इह तां चित चेते वी नहीं सी

तेरे नाल बोलण लई वी

बोलणा पवेगा

जो देह आखदी है

उह कहिण जोगे शबद हुंदे

मैं कहि दिंदी

तूं मेरी देह दी बोली

जाणदा हैं मैथों वी वध

मेरा अंदरला कहिंदा है

जदों जीअ जहान सौं गिआ

मेरा बूहा खड़केगा

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