जून 28, 2026

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By: सुरजीत पातर

कोई दसतार रत लिबड़ी कोई तलवार आई है

कोई दसतार रत लिबड़ी कोई तलवार आई है

लिआओ सरदलां तों चुक्क के अख़बार आई है

घरां दी अग्ग सिआणी ए तदे इस दी लपेट अंदर

बगानी धी ही आई है कि जिंनी वार आई है

लगाई सी जो तीलां नाल, बुझदी नां अपीलां नाल

नहीं मुड़दी दलीलां नाल अगन जु दुआर आई है

ऐ मेरे शहिर दे लोको बहुत खुश है तुहाडे 'ते

तुहाडे शहिर वल्ल गिरझां दी इह जो डार आई है

असां बीजे, तुसां बीजे, किसे बीजे, चलो छड्डो

करो झोली, भरो अंगिआर, लउ कि बहार आई है

नदी एनी चहड़ी कि नीर दहिलीज़ां 'ते चहड़ आइआ

बदी एनी वधी कि आपणे विचकार आई है

कोई कोंपल नवीं फुट्टी कि कोई डाल है टुटी

कि आई जान विच मुठ्ठी, किसे दी तार आई है