अक्टूबर 27, 2009

writingDetail.created_by
By: संदीप धनोआ

26 जनवरी‎…‎

बेहद्द शरमसार जिही

इशतिहार आ गई।

रुळण दर-दर होके

तिआर आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

उडी चिड़्ड़ी चोग चुगण

दी चाहत `च अज्ज‎,‎

मरी खंभिआं `च फस

घरे तार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

पौण‎,‎ पाणी‎,‎ दाणे‎,‎ दिल

काहतों होए ज़हिरीले‎,‎

हत्थीं घोली विस चौहां

विचकार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

कल्ला‐कल्ला‎,‎ मां दा पुत्त‎,‎

लै गए ठाणे‎,‎ चोरीं चुक्क।

जान चक्की दिआं पुड़ां‎,‎

विचकार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

 

ढिड्डों जंमी हत्थीं मार

करे जंता नूं पिआर‎,‎

कुख्खीं करुंबलां उजाड़न

बहार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

रोळ इज़्ज़तां वपारी

मंडी लाउण बोलीआं।

वड्डी इज़्ज़तां वाली

उमीदवार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई

चट्ट जुत्तीआं दे थल्ले

बल्ले बल्ले‎,‎ नोट गल्ले‎,‎

वोटां भीख विच्च मंग

सरकार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

रातीं सुत्ते नाल चैन

दिने पैण विहड़े वैण।

हत्थीं लुट्ट के गई सी

पहिरेदार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

सठ्ठां वरिआं दी होई

सुत्ती‎,‎ नंगी-भुख्खी मोई

लोकतंतर दे विहड़े

गुलज़ार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई

धक्कम-धक्का सारे पासे

कावां-रौली जग्ग हासे

हासे-हासे `च मरी

उह थल्ले कार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

विच्च मुलक बेगाने

अज्ज दस्सीए वी की‎,‎

काहतों पाणीआं नूं चीर

जंता पार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

जो है देखिआ‎,‎ हंडाइआ

ओही याद अज्ज आइआ‎,‎

दसां सालां विच्च किहड़ी

है बहार आ गई?

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

ढिड्डों जंमी हत्थीं मार

करे जंता नूं पिआर‎,‎

कुख्खीं करुंबलां उजाड़न

बहार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

रोळ इज़्ज़तां वपारी

मंडी लाउण बोलीआं।

वड्डी इज़्ज़तां वाली

उमीदवार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई

चट्ट जुत्तीआं दे थल्ले

बल्ले बल्ले‎,‎ नोट गल्ले‎,‎

वोटां भीख विच्च मंग

सरकार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

रातीं सुत्ते नाल चैन

दिने पैण विहड़े वैण।

हत्थीं लुट्ट के गई सी

पहिरेदार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

सठ्ठां वरिआं दी होई

सुत्ती‎,‎ नंगी-भुख्खी मोई

लोकतंतर दे विहड़े

गुलज़ार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई

धक्कम-धक्का सारे पासे

कावां-रौली जग्ग हासे

हासे-हासे `च मरी

उह थल्ले कार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

विच्च मुलक बेगाने

अज्ज दस्सीए वी की‎,‎

काहतों पाणीआं नूं चीर

जंता पार आ गई।

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।

जो है देखिआ‎,‎ हंडाइआ

ओही याद अज्ज आइआ‎,‎

दसां सालां विच्च किहड़ी

है बहार आ गई?

छब्बी जनवरी दी नवीं

अखबार आ गई।