वारतक साहित दा इक्क अजिहा महत्तवपूरण रूप है जिस विच्च लेखक आपणे मनोभावां नूं कलातमक ढंग नाल गुंद के पाठकां साहमणे पेश करदा है। वारतक पहड़ के पाठक दी बौधिक संतुशटी हुंदी है। जिंनी कलातमकता नाल वारतककार आपणे विचारां नूं जोड़दा है, उसदी वारतक उंनी ही प्रभावसाली हुंदी है। पंजाबी विच्च वारतक बहुत घट्ट लिखी जा रही है, कुझ गिणे-चुणे लेखक ही वारताक लिख रहे हन। सुखदेव सिंघ झंड कैनेडा दे उहनां चंद कु लेखकां विच्चों है जिहड़े वारतक लिखण वल्ल रुचित हन। ‘सरोकार अते शखसीअतां’ उसदी वारतक दी नवीं पुसतक है।

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