हर किसे दी पीड़ नूं अपनाअ के देख।
ज़िंदगी मज़लूम लेखे ला के देख।
चुप्प रहि के बोलणा सिख्ख जाइंगा,
परबतां दी चुप्प नूं अपणाअ के देख।
दूजे ताईं धोखा देवीं फेर तूं,
देख पहिलां आप धोखा खाके देख।
है ज़रूरी तुरदे रहिणा सोच दा,
बस्स ज़रा चिंता नूं चिंतन ला के देख।
कहिणगीआं जी आइआं पगडंडीआं,
पैरां दे छाले ज़रा चमका के देख।
सारे दीवे साथ तेरा देणगे,
चानणां दा गीत कोई गा के देख
झील मिठ्ठी ताईं भुल्लण वासते,
सागर खारे तारी ला के देख।
चुण के तारे भर लै झोळी आपणी,
इक्क तारा मत्थे ’ते चमका के देख।

